तहक्षी™ Tehxi
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@yajnshri

13 Tweets 7 reads Jul 16, 2024
॥ यज्ञ तथा यज्ञ विधी ॥ 🧵
♦️यज्ञ के प्रकार
♦️श्रौत यज्ञ तथा स्मार्त यज्ञ का विवरण
♦️श्रौत यज्ञ के प्रकार
♦️स्मार्त यज्ञ के प्रकार
♦️यज्ञों के नियम तथा विधि
(सभी प्रकार के यज्ञ का पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए यह #Thread को अंत तक पढ़े)
♦️यज्ञ दो प्रकार के होते है -
🔹 श्रौतयज्ञ - श्रुति प्रतिपादित यज्ञो को श्रौत यज्ञ कहते है इनमें सिर्फ श्रुति प्रतिपादित मंत्रो का प्रयोग होता है
🔹 स्मार्तयज्ञ - स्मृति प्रतिपादित यज्ञो को स्मार्त यज्ञ कहते हैं इनमें सिर्फ वैदिक, पौराणिक और तांत्रिक मंन्त्रों का प्रयोग होता है। (1/12)
🔹श्रुति प्रतिपादित यज्ञों (श्रौतयज्ञ) में पांच यज्ञ प्रधान माने गये हैं
1. अग्नि होत्रम्
2. दर्शपौर्णमास
3. चातुर्मास्य
4. पशुयाग
5. सोमयज्ञ (2/12)
♦️श्रौत यज्ञ १९ प्रकार है।
विवाह के अनन्तर विधिपूर्वक अग्नि का स्थापन करके जिस अग्नि में प्रातः सायं नित्य हवनादि कृत्य किये जाते हैं, उसे स्मार्ताग्नि कहते हैं! गृहस्थ को स्मार्ताग्नि में ही पका भोजन प्रतिदिन करना चाहिये।
1. स्मार्तयज्ञ
विधिपूर्वक दक्षिणाग्नि स्थापना को श्रौताधान कहते हैं! इसमें पितृ संबंधी कार्य होते हैं! (3/12)
2. श्रौताधान यज्ञ
अमावस्या और पूर्णिमा को होने वाले यज्ञ को दर्श और पौर्णमास कहते हैं! इस यज्ञ का अधिकार सपत्नीक होता है। इस यज्ञ का अनुष्ठान आजीवन करना चाहिए यदि कोई जीवन भर करने में असमर्थ है तो 30 वर्ष तक तो करना चाहिए।
3. दर्शपौर्णमास यज्ञ
चार-चार महीने पर किये जाने वाले यज्ञ को चातुर्मास्य यज्ञ कहते हैं!
4. चातुर्मास्य यज्ञ
प्रति वर्ष वर्षा ऋतु में या दक्षिणायन या उतरायण में संक्रान्ति के दिन एक
(4/12)
5. पशु यज्ञ
बार जो पशु यज्ञ किया जाता है, उसे निरूढ पशु-यज्ञ कहते हैं!
6. आग्रहायणेष्टि (नवान्न यज्ञ) :-
प्रति वर्ष वसन्त और शरद ऋतुओं में नवीन अन्न (गेहूँ व चावल) से जो यज्ञ किया जाता है, उसे नवान्न कहते हैं!
7. श्रौतामणी-यज्ञ (पशुयज्ञ) :-
इन्द्र के निमित्त जो यज्ञ किया जाता है उसे श्रौतामणी यज्ञ कहते हैं! यह इन्द्र संबन्धी पशु-यज्ञ है ! यह यज्ञ दो प्रकार का है। एक वह जो पांच दिन में पूरा होता है। इस श्रौतामणी यज्ञ में गोदुग्ध के साथ सुरा (मद्य) का भी प्रयोग है। किन्तु कलियुग में वर्ज्य है। दूसरा पशुयाग कहा जाता है। क्योकि इसमें पांच अथवा तीन पशुओं की बली दी जाती है। (5/12)
8. सोम यज्ञ - सोमलता द्वारा जो यज्ञ किया जाता है उसे सोम यज्ञ कहते हैं! यह वसन्त में होता है ! यह यज्ञ एक ही दिन में पूर्ण होता है। इस यज्ञ में 16 ऋत्विक ब्राह्मण होते हैं।
9. वाजपेय यज्ञ :- इस यज्ञ के आदि और अन्त में बृहस्पति नामक सोम याग अथवा अग्निष्टोम यज्ञ होता है ! यह यज्ञ शरद रितु में होता है।
10. राजसूय यज्ञ राजसूय याग करने के बाद क्षत्रिय राजा चक्रवर्ती उपाधि को धारण करता है। (6/12)
11. अश्वमेघ यज्ञ - इस यज्ञ में दिग्विजय के लिए (घोडा) छोडा जाता है। यह यज्ञ दो वर्ष से भी अधिक समय में समाप्त होता है। इस यज्ञ का अधिकार सार्वभौम चक्रवर्ती राजा को ही होता है।
12. पुरुषमेध-यज्ञ :-
इस यज्ञ की समाप्ति चालीस दिनों में होती है। इस यज्ञ को करने के बाद यज्ञकर्ता गृह त्यागपूर्वक वान प्रस्थाश्रम में प्रवेश कर सकता है।
13. सर्वमेध यज्ञ :-
इस यज्ञ में सभी प्रकार के अन्नों और वनस्पतियों का हवन होता है। यह यज्ञ चौंतीस दिनों में समाप्त होता है।
14. एकाह यज्ञ - एक दिन में होने वाले यज्ञ को एकाह यज्ञ कहते हैं। इस यज्ञ में एक यजमान और सौलह विद्वान होते हैं! (7/12)
♦️स्मार्त यज्ञ:-
यह तीन प्रकार का होता हैं रुद्र, महारुद्र और अतिरुद्र !
🔹रुद्र यज्ञ-
5, 7, 9 दिन में होता है। 16 या 21 विद्वान होते हैं! हवन सामग्री 11 मन
🔹महारुद्र -
9, 11 दिन में होता हैं। 31 या 41 विद्वान होते हैं! हवन सामग्री 21 मन
🔹अतिरुद्र -
9, 11 दिन में होता है। 61 या 71 विद्वान होते हैं! हवन सामग्री 70 मन
(8/12)
♦️ विष्णु यज्ञ:-
यह यज्ञ भी तीन प्रकार का होता है। विष्णुयज्ञ, महाविष्णुयज्ञ, अतिविष्णुयज्ञ !
🔹विष्णु यज्ञ :-
5, 7, 8, 9 दिन में होता है। 16 विद्वान होते हैं! हवन सामग्री 11 मन
🔹महाविष्णु यज्ञ:-
9 दिन में होता है। 41 विद्वान होते हैं! हवन सामग्री 21 मन
🔹:- अतिविष्णु
9 दिन में होता है। 21 या 61 विद्वान होते हैं! हवन सामग्री 55 मन
(9/12)
♦️ हरिहर यज्ञ :- हरिहर महायज्ञ में हरि (विष्णु) और हर (शिव) इन दोनों का यज्ञ होता है। हरिहर यज्ञ में 16 अथवा 21 विद्वान होते हैं! हरिहर याग में हवन सामग्री 25 मन लगती हैं। यह महायज्ञ 9 दिन अथवा 11 दिन में होता है।
♦️शिव शक्ति महायज्ञ:-
शिवशक्ति महायज्ञ में शिव और शक्ति (दुर्गा) इन दोनों का यज्ञ होता है। शिव यज्ञ प्रातः काल और शक्ति (दुर्गा) इन दोनों का यज्ञ होता है। शिव यज्ञ प्रातः काल और मध्याह्न में होता है। इस यज्ञ में हवन सामग्री 15 मन लगती है, तथा 21 विद्वान होते हैं! यह महायज्ञ 9 दिन अथवा 11 दिन में सुसम्पन्न होता है।
(10/12)
♦️ राम यज्ञ:-
राम यज्ञ विष्णु यज्ञ की तरह होता है। रामजी की आहुति होती है। रामयज्ञ में 16 अथवा 21 विद्वान होते हैं! हवन सामग्री 15 मन लगती है। यह यज्ञ 8 दिन में होता है।
♦️गणेश यज्ञ
गणेश यज्ञ में एक लाख आहुति होती है। 16 अथवा 21 विद्वान होते है। गणेशयज्ञ में हवन सामग्री 21 मन लगती है। यह यज्ञ 8 दिन में होता है।
(11/12)
♦️ब्रह्म यज्ञ (प्रजापति यज्ञ)
प्रजापत्ति यज्ञ में एक लाख आहुति होती हैं इसमें 16 अथवा 21 विद्वान होते है। प्रजापति यज्ञ में 12 मन सामग्री लगती है। 8 दिन में होता है।
♦️सूर्य यज्ञ
सूर्य यज्ञ में एक करोड़ आहुति होती है। 16 अथवा 21 विद्वान होते है। सूर्य यज्ञ 21 दिन में किया जाता है।
(12/12)
अस्तु 🙏
5. ****** (correction ) पशु यज्ञ *** प्रति वर्ष वर्षा ऋतु में या दक्षिणायन या उतरायण में संक्रान्ति के दिन एक बार जो पशु-याग किया जाता है, उसे निरूढ पशु-याग कहते हैं!

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